करनैलगंज/गोण्डा- आजकल हम अक्सर यह महसूस करते हैं कि जब किसी को छूते हैं या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के पास होते हैं, तो एक अजीब सा झटका महसूस होता है। यह झटका कभी हल्का और कभी तीव्र होता है, और इसके कारण का अक्सर हमें पता नहीं चलता। क्या यह शारीरिक प्रतिक्रिया है, या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है?
हमारी आधुनिक ज़िन्दगी में स्मार्टफोन, वाई-फाई, ब्लूटूथ और अन्य वायरलेस उपकरणों का प्रयोग बढ़ गया है। ये सभी उपकरण इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन उत्पन्न करते हैं, जो हमारे शरीर पर असर डाल सकते हैं। यह रेडिएशन हमारे तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे शरीर में हल्के विद्युत संकेत उत्पन्न होते हैं। जब हम इन उपकरणों के पास होते हैं, तो हमें इसका अहसास हो सकता है, जिससे हमें झटका महसूस होता है।
इसके अलावा, मोबाइल टावर और संचार उपकरण भी रेडिएशन के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। इनसे निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें हमारे शरीर से संपर्क करती हैं, और लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से हमें तेज़ झटका महसूस हो सकता है। यह अनुभव एक विद्युत प्रवाह के परिणामस्वरूप होता है, जो शरीर में महसूस होता है।
यह भी हो सकता है कि यह झटका मानसिक और भावनात्मक स्थिति से जुड़ा हो। जब हम किसी प्रिय व्यक्ति को छूते हैं, तो हमारे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह उत्पन्न होता है, जो तंत्रिका तंत्र के जरिए शरीर में फैलता है। खासकर जब हम किसी से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं, तो यह अनुभव और भी तीव्र हो सकता है। इसका मतलब यह है कि यह झटका सिर्फ शारीरिक नहीं है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक कारणों से भी उत्पन्न हो सकता है।
विज्ञान की दृष्टि से, यह झटका तंत्रिका तंत्र द्वारा उत्पन्न विद्युत संकेतों का परिणाम है। जब हम इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के संपर्क में आते हैं, तो तंत्रिका तंत्र उसे महसूस करता है और हमें झटका जैसा अनुभव होता है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि आजकल छूने पर जो तेज़ झटका महसूस होता है, वह केवल शारीरिक नहीं, बल्कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन और मानसिक स्थिति का परिणाम भी हो सकता है। इसलिए, इस प्रभाव से बचने के उपायों को अपनाना जरूरी है ताकि हम एक स्वस्थ जीवन जी सकें।
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