Feb 17, 2026

February 17, 2026

आखिर क्यों लाइन हाजिर किए गए परसपुर थानाध्यक्ष अनुज त्रिपाठी? चर्चा तेज

गोण्डा - करीब पांच माह से परसपुर में तैनात रहे अनुज त्रिपाठी लाइन हाजिर  कर दिए गए। एसपी विनीत जायसवाल एसओ अनुज त्रिपाठी को हटाकर वहां दूसरे थानाध्यक्ष को तैनात कर दिया है। वहीं एसओ अनुज त्रिपाठी को थाने से हटाने के पीछे चर्चित जमीनी विवाद की चर्चा है, माना जा रहा है कि जमीनी विवाद में एसओ की भूमिका की जांच के दौरान कार्रवाई हुई 

Feb 16, 2026

February 16, 2026

आज AIMIM ने शहीर खान को बनाया प्रदेश सचिव

बहराइच - AIMIM ने डॉ शहीर खान को प्रदेश सचिव बनाया,लखनऊ प्रदेश कार्यालय में उन्हें नियुक्ति पत्र दिया गया। प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने नियुक्त पत्र दिया।
February 16, 2026

परसपुर थानाध्यक्ष अनुज त्रिपाठी लाइन हाजिर

गोण्डा - थानाध्यक्ष को लापरवाही भारी पड़ गई, एसपी ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें लाइन हाजिर कर दिया। बता दें कि अनुज त्रिपाठी को अभी कुछ दिनों पूर्व ही परसपुर थानाध्यक्ष का चार्ज मिला था। 
February 16, 2026

संदिग्ध हालत में मिला विवाहिता का शव

श्रावस्ती - संदिग्ध परिस्थितियों में विवाहिता की मौत हो गई, पीड़ित द्वारा ससुरालीजनों पर मारपीट और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है, घटना श्रावस्ती के मल्हीपुर थानाक्षेत्र की है।

February 16, 2026

महिला पर लाठी-डंडों से हमला कर तोड़ा हाथ,तीन के विरुद्ध मुकदमा दर्ज


गोण्डा - थाना कौड़िया क्षेत्र के ग्राम चयपुरवा में मारपीट की गंभीर घटना सामने आई है। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम चयपुरवा निवासी जर्राक अली ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि 14 फरवरी की सुबह करीब 8 बजे गांव के ही जुबेर, वाहिद व हाथी लाठी-डंडों से लैस होकर उसके दरवाजे पर पहुंचे और गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने पर आरोपियों ने उसके साथ ही उसकी मां किस्मतुल की पिटाई कर दी। बताया जाता है कि मारपीट के दौरान महिला को गंभीर चोटें आईं और उसका हाथ टूट गया। शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे तो आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। घटना के संबंध में थाना कौड़िया के प्रभारी ने बताया कि तहरीर के आधार पर तीनों आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
February 16, 2026

चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप: नवजात के बाद प्रसूता की भी मौत


गोण्डा - नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित जीवनदीप चिकित्सालय में इलाज के दौरान नवजात शिशु और प्रसूता की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, जनपद के पयागपुर क्षेत्र निवासी 30 वर्षीय पूजा सिंह को 6 फरवरी को तबीयत खराब होने पर जीवनदीप चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने स्थिति सामान्य बताते हुए उन्हें घर भेज दिया। इसके बाद 10 फरवरी तक सुबह-शाम जांच और इंजेक्शन के लिए अस्पताल लाया जाता रहा। बताया जाता है कि 10 फरवरी की रात अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दोबारा अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां ऑपरेशन के माध्यम से डिलीवरी कराई गई। इस दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद भी प्रसूता को अस्पताल में ही भर्ती रखा गया और उपचार जारी रहा। परिजनों का कहना है कि पिछले पांच दिनों से उनका इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। आरोप है कि इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई, जिसके चलते प्रसूता की भी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और परिजन आक्रोशित हो उठे। मृतका के देवर रामसिंह ने बताया कि ऑपरेशन के बाद भी डॉक्टरों ने स्थिति सामान्य बताई थी, जबकि उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि समय रहते उचित उपचार नहीं दिया गया, जिसके कारण पहले नवजात और फिर प्रसूता की जान चली गई। परिजनों ने दोषी चिकित्सकों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
घटना की सूचना मिलते ही नगर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक जानकारी जुटाते हुए जांच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है, तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं जीवनदीप चिकित्सालय की डॉक्टर सुवर्णा कुमार ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मरीज की स्थिति पहले से ही गंभीर थी। चिकित्सकों द्वारा समुचित इलाज किया गया, लेकिन अत्यधिक जटिलता के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि अस्पताल की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है। फिलहाल मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। परिजन न्याय की मांग पर अड़े हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है। नवजात शिशु और प्रसूता की मौत के मामले ने न केवल अस्पताल प्रबंधन, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। परिजनों के आरोपों के बीच अब स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।