Feb 4, 2026
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गन्ना बुवाई का सुनहरा मौका: अधिक क्षेत्र में लगाएं स्वीकृत किस्में
गन्ना बुवाई का सुनहरा मौका: अधिक क्षेत्र में लगाएं स्वीकृत किस्में
बहराइच/फखरपुर कोठवल कलां (पारले चीनी मिल क्षेत्र): ग्राम पंचायत कोठवल कलां में आयोजित मीटिंग में पारले कंपनी के उप मुख्य गन्ना प्रबंधक संजीव राठी ने किसानों से अपील की कि अभी गन्ना बुवाई का सबसे अनुकूल समय है। उन्होंने कहा, "खाली खेतों में तत्काल बुवाई करें। इस वर्ष अधिक क्षेत्रफल में लगाएं, क्योंकि मिल आपके क्षेत्र में ही है। बीज अभी पर्याप्त हैं, देरी से समस्या हो सकती है।"स्वीकृत प्रजातियां:सामान्य: 15023, 0118, 14201, 13235, 16202, 18231जलभराव प्रतिरोधी: 94184, 15466, 98014महत्वपूर्ण बुवाई सुझाव:खेत तैयार करते समय ट्राइकोडर्मा व जैविक खाद मिलाएं।अच्छी जुताई करें।पंक्ति दूरी 4 फीट से कम न रखें।अस्वीकृत किस्में (05191, 9302, 0233) न लगाएं—कंपनी अगले साल इनकी खरीद नहीं करेगी।शोधित गुणवत्ता बीज लें, बेहतर जमाव के लिए।राठी ने पेराई सुचारू रखने पर जोर देते हुए साफ-सुथरा, ताजा, जड़-अग्रोला रहित व मिट्टी मुक्त गन्ना लाने को कहा। पर्ची के अनुसार ही दें—अगेती पर अगेती, सामान्य पर सामान्य।मीटिंग में कुंवर संत पाल सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह, मुन्ना शाहू, मुन्ना सिंह, संदीप सिंह, विपिन, कल्याण, हरिशंकर सिंह, राहुल सिंह, सुधीर सिंह मल्लन, अजित सिंह, राजन सिंह, चंदन सहित बड़ी संख्या में किसान व मिल अधिकारी दीपक श्रीवास्तव, शरीफ अंसारी मौजूद रहे।
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जीत गए अनुदेशक! सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, यूपी सरकार को तगड़ा झटका—नौकरी पक्की, ₹17,000 मानदेय मंजूर
जीत गए अनुदेशक! सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, यूपी सरकार को तगड़ा झटका—नौकरी पक्की, ₹17,000 मानदेय मंजूर
लखनऊ, 4 फरवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सरकारी जूनियर स्कूलों में कार्यरत अनुदेशकों को ऐतिहासिक राहत दी। कोर्ट ने उनकी नौकरी को सुरक्षित घोषित किया, ₹17,000 मासिक मानदेय को सही ठहराया और यूपी सरकार की अपील खारिज कर दी। 10 वर्षों की लगातार सेवा के कारण अनुदेशकों को "डीम्ड परमानेंट/फुल टाइम" माना गया। संविदा खत्म होने पर भी सेवा स्वतः समाप्त नहीं होगी—यह कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी है।कोर्ट के प्रमुख निर्देश नौकरी सुरक्षित: उत्तर प्रदेश के सरकारी जूनियर स्कूलों में अनुदेशकों की नौकरी खत्म नहीं होगी। लगातार सेवा से पद स्वतः सृजित माना गया।₹17,000 मानदेय मंजूर: सुप्रीम कोर्ट ने इस राशि को 2017-18 से प्रभावी करार दिया। अगले संशोधन तक यही मान्य रहेगी।सरकार की अपील खारिज: मानदेय बढ़ाने के खिलाफ यूपी सरकार की SLP को रद्द कर दिया।अनुचित श्रम पर सख्ती: 2013 से ₹7,000 मानदेय को "अनुचित श्रम व्यवहार" कहा। संविधान के अनुच्छेद 23 (जबरन श्रम निषेध) का हवाला देकर कोर्ट ने चेताया—₹17,000 से कम देना असंवैधानिक।पुनरीक्षण का अधिकार: अंशकालिक शिक्षकों को नियत अवधि पर मानदेय बढ़ाने का पूरा हक।भुगतान समयसीमा: 1 अप्रैल 2026 से नियमित भुगतान शुरू। 4 फरवरी 2026 से 6 महीने में 2017 से अब तक का पूरा बकाया (एरियर) चुकाना अनिवार्य।कोर्ट ने सरकार से तीखा सवाल किया: "जब पढ़ेगा इंडिया, तभी बढ़ेगा इंडिया—मानदेय देने में दिक्कत क्या है?"संघर्ष की कहानी और प्रभाव यह फैसला अनुदेशकों के वर्षों के संघर्ष की जीत है, जो शिक्षा, सम्मान और अधिकार तीनों की मिसाल है। 2013 में नियुक्त ये शिक्षक ग्रामीण यूपी (लखनऊ, बहराइच समेत) की प्राथमिक शिक्षा की आधारशिला हैं। कम मानदेय से परेशान होकर उन्होंने हाईकोर्ट से राहत ली, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। प्रदेश के 1.5 लाख अनुदेशक अब बिना डर के पढ़ा सकेंगे, जिससे स्कूलों की staffing मजबूत होगी।अनुदेशक संघ के नेता ने कहा, "कोर्ट ने हमारा हक दिलाया। सरकार अब देरी न करे।
