Jun 14, 2026
कर्नलगंज: मुठभेड़ में फायरिंग, गोली लगने से बदमाश हुआ घायल
Jun 13, 2026
बलिदान दिवस पर चहलारी नरेश बलभद्र सिंह को किया नमन क्षत्रिय भवन में श्रद्धांजलि सभा व काव्य गोष्ठी आयोजित
बलिदान दिवस पर चहलारी नरेश बलभद्र सिंह को किया नमन
क्षत्रिय भवन में श्रद्धांजलि सभा व काव्य गोष्ठी आयोजित
बहराइच। 1857 स्वतंत्रता आन्दोलन के महानायक चहलारी नरेश महराजा बलभद्र सिंह का बलिदान दिवस जिले के अनेक स्थानों पर मनाया गया। नगर के सूफीपुरा स्थित सुखदराज सिंह क्षत्रिय भवन में श्रद्धांजलि सभा व काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने श्रद्धांजलि देते हुए नमन किया तथा उनकी वीरता का बखान किया। कवियों द्वारा अपनी कविताओं के माध्यम से चहलारी नरेश बलभद्र सिंह द्वारा अंग्रेजों के विरूद्ध दिखायी गई वीरता की कविताएं सुनाई। मुख्य अतिथि पूर्व शिक्षक रंग बहादुर सिंह शास्त्री रहे। अध्यक्षता क्षत्रिय समाज के जिलाध्यक्ष डा.जितेन्द्र सिंह ने की। संचालन कवि रामसूरत वर्मा जलज ने किया। जबकि कार्यक्रम संयोजक चहलारी नरेश उत्तराधिकारी आदित्यभान सिंह रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ चहलारी नरेश के चित्र पर मार्ल्यापण व दीप प्रज्जवलन के साथ भगवान श्री राम के वंदना से हुआ। कवि गुलाब जायसवाल, राम सूरत वर्मा जलज, पी.के.प्रचण्ड, महेन्द्र सिंह चौहान सहित अन्य कवियों द्वारा अपनी कविताओं के माध्यम से चहलारी नरेश की वीरता पर प्रकाश डाला व 1857 के स्वतंत्रता आन्दोलन में उनकी वीरता की चर्चा की। कार्यक्रम में बोलते हुए सेनानी परिषद महामंत्री रमेश मिश्र ने कहा कि चहलारी नरेश बलभद्र सिंह ने बगैर कोई संगठन व जाति पाति का भेदभाव किए अंग्रेजो से लोहा लिया था। उनकी वीरता आज भी लोगों के लिए प्रेरणा है। कांग्रेस नेता विनय सिंह ने चहलारी नरेश को याद करते हुए बताया कि स्कूलों व अन्य जगहों पर बलभद्र सिंह पर निबंध तथा अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित की जायें ताकि युवा पीढ़ी के लिए वह प्रेरणा स्रोत बन सके। क्षत्रिय समाज जिलाध्यक्ष डा.जितेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकारों की उदासीनता के चलते आज चहलारी नरेश बलभद्र सिंह जैसे सेनानियों को इतिहास में उचित स्थान नही दिया गया। आज यदि संविधान है तो उन्हीं के सर कटाने के बदौलत। कार्यक्रम संयोजक चहलारी नरेश उत्तराधिकारी आदित्यभान सिंह ने 1857 के स्वतंत्रता आन्दोलन का जिक्र करते हुए अवध के राजाओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बाराबंकी के राम चबूतरे पर बेगम हजरत महल द्वारा रखे गए पान के बीड़े को उठाकर चहलारी नरेश ने अंग्रेजो से युद्ध करने का संकल्प लिया था और वे 18 वर्ष की आयु में देश के लिए शहीद हो गए थे। कार्यक्रम को पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी, भानु प्रताप द्विवेदी, घनश्याम सिंह बरदहा सहित कई अन्य लोगों ने सम्बोधित किया। इस दौरान धु्रवराज सिंह, राजेन्द्र सिंह, विमलेश जायसवाल, राहुल सिंह, शौर्या पालीवाल सहित तमाम अन्य लोग मौजूद रहे।

