बेसहारा गोवंशों का संरक्षण हमारा दायित्व: अतुल सिंह
गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष ने गौआश्रय स्थलों का किया निरीक्षण
विकास भवन सभागार में अधिकारियों के साथ की बैठक
बहराइच । जनपद में संचालित गौआश्रय स्थलों पर संरक्षित गोवंशों हेतु की गई व्यवस्थाओं का जायज़ा लेने के उद्देश्य से मा. उपाध्यक्ष उ.प्र. गोसेवा आयोग अतुल सिंह ने एक दिवसीय जनपद भ्रमण के दौरान सम्बन्धित अधिकारियों के साथ अस्थायी गौआश्रय स्थल कटरा बहादुरगंज व अलिया बुलबुल तथा वृहद गोसंरक्षण केन्द्र चफरिया का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान श्री सिंह ने गोवंशों के पेयजल एवं भूसे चारे इत्यादि व्यवस्थाओं का जायज़ा लेते हुए निर्देश दिया कि प्रत्येक दशा में गोवंशों को भूसा के साथ प्रचुर मात्रा में हरा चारा भी दिया जाय। उन्होंने चरनी की गहराई को कम रखा जाय। संरक्षित गोवंशों की मृत्यु दर में कमी लाये जाने के लिए निर्देश दिया कि पशुपालन विभाग के अधिकारी कर्मचारी व पैरावेट नियमित रूप से गोआश्रय स्थलों का भ्रमण करें। उपाध्यक्ष श्री सिंह ने निर्देश दिया कि संरक्षित गोवंशों के स्वास्थ्यहित को दृष्टिगत रखते हुए प्रत्येक आश्रय स्थल पर एक पैरावेट/पशुमित्र की तैनाती केयरटेकर के रूप में तैनात किया जाय। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग में कार्मिकों की कमी होने के कारण आश्रय स्थल पर तैनात पैरावेट के माध्यम से बीमार व वृद्ध गोवंशों को बेहतर चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी। वृहद गोसंरक्षण केन्द्र चफरिया के निरीक्षण के दौरान श्री सिंह ने व्यवस्थाओं पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए निर्देश दिया कि वर्षाकाल के दौरान संचालित होने वाले वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान वृहद पौधरोपण कराया जाय। जिससे पशुओं को गर्मी में राहत के साथ साथ उन्हें छाव भी उपलब्ध रहे।अस्थायी गौआश्रय स्थल अलियाबुलबुल के निरीक्षण के दौरान संरक्षित पशु स्वस्थ पाये गये। श्री सिंह ने निर्देश दिया कि छोटे व कमज़ोर पशुओं के लिए अलग शेड बनाया जाय। सफाई व्यवस्था को और बेहतर रखा जाय तथा संरक्षित गोवंशों के पानी पीने के लिए अतिरिक्त चरनी बनायी जाय। मौके पर मौजूद ग्राम प्रधान ने बताया कि 07 बीघे चरी बोयी गई है तथा 28 बीघे का एमओयू कराया गया है जिससे हरा चारा प्राप्त हो रहा है। मा. उपाध्यक्ष ने निर्देश दिया कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम अन्तर्गत भ्रूण प्रत्यारोपण ट्रांसफर के माध्यम से गोसंवर्धन का कार्य भी गोआश्रय स्थलों पर कराया जाय। उल्लेखनीय है कि क्षेत्र भ्रमण के पश्चात उपाध्यक्ष श्री सिंह ने विकास भवन सभागार में गोसंरक्षण एवं अनुश्रवण समिति के अधिकारियों एवं पदाधिकारियों के साथ आयोजित बैठक के दौरान निर्देश दिया कि ग्रीष्म ऋतु को मद्देनज़र रखते हुए गौआश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशों के लिए स्वच्छ पेयजल तथा लू व धूप से बचाव के माकूल बन्दोबस्त रखने के साथ-साथ चारा, भूसा, हरे चारे का प्रबन्ध सुनिश्चित किया जाय। गेहूॅ कटाई के सीज़न को देखते हुए उन्होंने गोवंशों में संरक्षित गोवंशों के सापेक्ष पर्याप्त मात्रा में भूसा स्टोर किये जाने का निर्देश दिया। गौआश्रय स्थलों में हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सुझाव दिया कि चारा उत्पादक किसानों से अनुबंध कर हरा चारा खरीदें जाने का सुझाव भी दिया। उपाध्यक्ष श्री सिंह ने कहा कि सभी बेसहारा गोवंशों का संरक्षण हमारा दायित्व है। श्री सिंह ने कहा कि गोवंशों के संरक्षण के साथ उनका संवर्धन किया जाना भी अत्यन्त आवश्यक है। निर्देश दिया कि गोशाला में उपलब्ध गोबर व गोमूत्र से गोबर के गमले, दीया समेत उपयोगी वस्तुएं तैयार कर गोआश्रय स्थलों का स्वावलम्बी बनाये तथा पशुपालकों को गोबर देकर उनसे भूसा प्राप्त किया जाय। उन्होंने सभी सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिया कि गोशालाओं का नियमित निरीक्षण कर शासन की मंशानुरूप व्यवस्थाओं को चाक-चौबन्द रखा जाय। गौआश्रय स्थलों के माध्यम से देशी नस्ल की दुधारू गायों का भी संवर्धन किया जाए। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार धनवंता, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश कुमार उपाध्याय सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी मौजूद रहे।


