प्रकृति की अद्भुत छटा: विलुप्त हो रही कबूतरों की प्रजाति के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना पौराणिक बाबा मलूकदास आश्रम
करनैलगंज/गोण्डा - कभी हर घर के आंगन, मुंडेर और चौपालों की शान रहे शांति के प्रतीक कबूतर अब धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर हैं। कई दुर्लभ प्रजातियां तो अब दिखाई भी नहीं देतीं।
बढ़ता प्रदूषण, मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएशन और दाना-पानी की कमी इनके अस्तित्व पर सबसे बड़ा खतरा बन गई है। विशेषज्ञों की मानें तो यदि समय रहते संरक्षण नहीं हुआ तो आने वाली पीढ़ी कबूतरों को सिर्फ किताबों में ही देख पाएगी।
लेकिन इस निराशा के बीच करनैलगंज से एक सुखद और उम्मीद भरी तस्वीर सामने आई है।
करनैलगंज स्थित पौराणिक बाबा मलूकदास आश्रम आज भी इन विलुप्त हो रही प्रजातियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। आश्रम की शांत और प्राकृतिक छटा में आज भी सैकड़ों कबूतरों की गुटर-गूं गूंजती है। यहां उन्हें पर्याप्त दाना-पानी और पूरी तरह सुरक्षित आश्रय मिल रहा है, जिस कारण यहां इनकी संख्या आज भी बरकरार है।